झाकड़ी: देश की सबसे बड़ी भूमिगत जल विद्युत परियोजना एसजेवीएन के नाथपा झाकड़ी हाइड्रो पॉवर स्टेशन ने अपने डिज़ाइन ऊर्जा उत्पादन में एक उल्लेखनीय सफलता दर्ज की है। आज दिनांक 29 नवंबर, 2025 को एनजेएचपीएस ने 6612 मिलियन यूनिट डिज़ाइन ऊर्जा प्राप्त कर अपनी दूसरी सबसे तेज़ डिज़ाइन ऊर्जा की उपलब्धि हासिल की है। इस उपलब्धि के साथ एनजेएचपीएस ने 1 दिसंबर, 2024 को स्थापित हुए अपने पिछले दूसरे सबसे तीव्र ऊर्जा रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
एनजेएचपीएस का सबसे तेज़ डिज़ाइन ऊर्जा उत्पादन इससे पहले 19 नवंबर, 2011 को वार्षिक सर्वोच्च उत्पादन के दौरान दर्ज किया गया था।
इस वर्ष का यह कीर्तिमान केवल आठ महीनों में हासिल कर लिया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2025–26 के चार महीने अभी शेष हैं। यह उपलब्धि नाथपा झाकड़ी हाइड्रो पावर स्टेशन की अद्भुत तकनीकी क्षमता, कार्यकुशलता और संचालन प्रणाली के निरंतर उन्नयन का स्पष्ट संकेत है। साथ ही यह दर्शाता है कि स्टेशन अपनी डिज़ाइन क्षमता का अधिकतम उपयोग करते हुए भविष्य में और भी उच्च उत्पादन स्तर छूने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इस अवसर पर अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एसजेवीएन श्री भूपेंद्र गुप्ता ने टीम के अद्वितीय प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए यह अभिव्यक्त किया कि भविष्य में भी इसी प्रकार की कार्य-निष्ठा, उत्कृष्टता तथा परिणाम-साधक क्षमता की सतत निरंतरता सुनिश्चित की जानी चाहिए, जिससे संगठन प्रतिष्ठित मानकों के अनुरूप नित नयी उपलब्धियाँ अर्जित करता रहे।
निदेशक (कार्मिक) एसजेवीएन अजय कुमार शर्मा ने भी सभी को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि संगठन की सामूहिक क्षमताओं, सुविचारित रणनीतियों और टीम के उत्कृष्ट समन्वय का प्रतिफल है।
परियोजना प्रमुख, एनजेएचपीएस राजीव कपूर ने इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड की प्राप्ति में मार्गदर्शन, निर्देशन एवं सहयोग प्रदान करने के लिए अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भूपेंद्र गुप्ता, निदेशक (कार्मिक) अजय कुमार शर्मा, भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय, सीईए, हिमाचल प्रदेश सरकार तथा शिमला/किन्नौर के स्थानीय प्रशासन के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।
साथ ही परियोजना प्रमुख राजीव कपूर ने इस उपलब्धि को टीम भावना और सभी विभागों के सामंजस्यपूर्ण प्रयास का परिणाम बताया। उन्होंने विशेष रूप से ओएंडएम, पावर हाउस और नाथपा टीम के समर्पण और योगदान की सराहना की, जिनकी बदौलत यह महत्वपूर्ण मील का पत्थर संभव हो पाया। उन्होंने इस उपलब्धि में योगदान देने वाले समस्त प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष हितधारकों तथा स्थानीय देवता श्री चंभू महाराज जी का विशेष धन्यवाद किया।








